कया हम फिर हार गऐ

जब से पाकिस्तानि के सिंध प्रांत में हिंदु लडकियों जा जबरन अपहरन  करने ऐंवम धर्म परिवर्तनि का विरोध सिंध में हिंदु ऐवम सिविल सोसाईटि नें किया है सबकी निगाहे पाकिस्तानि की सुख्य न्यालय ऐं मुख्य नयाधिश श्री इफतिकारि महिमद चौधरि पर ही रहि है। अब तक यहि मान्यता रहि थी की निचली अदालतो में भले ही कितनी भी भ्रष्ट कयो नह हो पर मुख्य नयाल्य ऐं मुख्य नयाधिश नया करेंगें।

यद्दपि सुपरिम कोर्ट ने 26 मार्च की पहलि पेशी में पाकिस्तानि के हिंदु समूदाय के हक में फैसला नही दिया था पर लडकियो की खुली अदालति में घभराहटि को देख कर अदालति खालि कराई थी। यहि नही इस अपहरण के पश्चात पहिली बार उनहोने रिंकल कुमारी ऐंवम डा. लता को उनके घर वालो से मिलाया गया। तिसरी लडकी आशा कुमारी कयो की अदातल में पेश नहि की गई सो वह अपहरनि के बादि अपने माता पिता से मिल न सकी। यहि नहिं मुख्य नयायधीश में सिंध में अल्पसंखकयो के हिमायत में हमदर्दी भी जताई कि वे पाकिस्तानि कामजोर तब्का है ओर उनकी हिफाजत की जाई। सुपरिम कोर्ट में अपनी पहलि पेशी के दौरान दोनो हिंदु समुदाऐ जी की लडकीयो को बल मिल था कि वे अपनी बात करे और दोनो लडकीयो नें जज को साफ साफ कहा जी वे अपने अपने मां बाप के घर जाना चाहती है। पर इसके बावजूद मुख्य नयायधीश श्री इफतिकार महूमद चौधरी नें उन दोनो लडकीयो को काराची में ओरतो के पनाहि घर में भेज दिया यह कह कर की दोनो लडकीयो का निकाह हो चुका है और दोनो को वकत चाहिऐ अपना फैसला करने के लिये।

अपनी मां से मिलने के बाद रिंकल फूट फूट कर रोते हूऐ जज साहब जो विनती करती रहि की उसे अपने घर वालो के साथ जोने दिया जाऐ पर ऐसा मूमकिनि नहि हूआ। मुख्य नयाधिश ने उनकी ऐक ना सुनी। लडकी के घर वाले भी विन्ती करते रहे कि उन्हे उनकी बेटिंया उनहे वापस दी जाऐ पर उनकी भी नही सुनी गई। पुलिस की बख्तरबंद गा॒डियो में बैठते हूऐ रिंकल के कहा जो पाकिस्तान के सिंधी प्रांत के ऐक निजी सिंधी टिवी चैनेरल के टि ऐन ने नसर किया। रिंकल कुमारी रोती हूंई कहती रहि- यहां सभ ऐक दुसरे से मिले हूऐं है। यहां पाकिस्तानि में सिर्फ मुसलमानो की सुनी जाती हैं हिंदुओ की नहीं।

रिंकल कुमारी जो रोते हूऐ कहति गई वह विलकु सौ फिसदी सच सुपरिम कोर्ट में उनकी दुसरी ऐंवम आखरि पेशी में हूआ। 18 अप्रैल को जब कोर्ट दूबारा तिन हिंदु लडकियो – रिंकल कुमारी, आशा कुमारी ऐं डा लता को पेश किया गया। इन बिच आशा जिसे जेकबाबादि, सिंध से अपहरण किया गया था उसे पेश किया गया। आशा कुमारी जी पहली पेशी में उसे मिया अब्दूल हक के साथियो के समर्थको ने पेश किया जिसपर आरोप है की रिकल को अग॒वा करके उनके पुत्र नोवेद शाह से जबर्दसती नकाहि कराया है।

18 अपरेल को पाकिस्तानि की उच्च नयालय नें तिनो हिंदु लडकीयो को पेश किया गया पर इन लडकीयों के बयान के नाम पर सिर्फ उनके नाम पुछे गऐ जिसमें उनहो ने अपने नऐ मुसलमानि नाम ही बताऐ। साफ है भरी अदालति में 18-19 साल की कडकी कितनी हिंम्मत जुटा पाऐगी की वह सच बो॒ले- वह भी जहा हिंदू बरादरी की किसी भी लडकी को ऐसे मामलो में नयाय नहि मिला हो। इसके उपरांत मुख्य न्यायधीश सुनबाई बडे अजिबो गरिब तरिके से चलाई। हिदु बरादरी के किसी भी वकिल को पना दलील रखने का मौका नही दिया गया जब कि अगवाकर्ता के वकिल के बयानो को सचे सबूत मानते हूऐ इनकी हर दलिल को सच मान लिया कि यह पूरा मसला महज सु-ईछा से धर्म परिवर्तनि का है ना कि अपहरनि का। नोवेद शाह के वकिल ने कहा की रिकल ने पहिले भी कोर्ट में यह बयानि दे चूकि हैं कि उनहे अगवा नहि किया गया है अर्थात अगवा या अपहरन जा कोई मामला नहि बंता। यही नही आशा कुमारी जिसे अग॒वा करने बाद बलूचिस्थान में रखा गया था – जिनकि सतविरे भी अखबारो में छपी थी जिनहे पेश करने जे बावजूद अपहरण के किसी भी अंशखा को मुख्य नयालय ने नकार  दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि नह ई अपहरण की हूईं लडकीया या अगवा करने वालो का कोई करास ऐगजामेनेशन हूआ।

कोर्ट का अश्चर्य चकित हर्कते यहि पर समाप्त नहि हूईं। मूख्य नयायधीश नें इन लडकीयो के इन केमेरा बयान रिकार्ड कराने के बजाऐ उनहे मुख्य नयालय जे रिजिस्टरार के पास भेज दिया जिसके साथ सिंध पुलिस भी थी। कुछ ही देर में इन तिनो लडकीयो की तरफ सिंध पुलिस का बयान आता है कि तिनो लडकियो नें अपने पतियो के साथ हरने का फैसला किया है। यह खबर सुनते ही लडकियो जी मां ऐवम परिजन रोते भिलखते रह गये ओर कोर्ट नें उन लडकियो पुलिस के हाथ सोपते हूऐ इस के को कुछ ही घंटो में समाप्त कर दिया।

अब  हम यदि रिकल कुमारी का 26 मार्च का बयान पर गौर करे तो उसने जो कहा था वह सही साबित हआ। यानि सभ मिले हूऐ थे। पाकिस्तानि में हिंदुओ की नही सुनी जाती है। यहि नहिं रिकल कुमारी पुलिस की बखतर बंद गाडी में चडते हूऐ अपने वकिल अमरलाल जो कहा वह दिल दहलाने वाला बया था। उसने कहा – आप लोग तो मुझे  बचा नह सके, अब मैं कया करुं खुद को कुर्बान कर दूं या अपने घर वालो को कूर्बान कर दूं। रिंकल कुमारी का यह बयान काफि माईने रखता है कयोकि जब से रिंकल क् हिमायति में उनके घर वाले ऐतजाज कर रहे है वे यातनाओ के भी शिकार हूऐ है। उनके घर वालों को पहिले तो घोटकी शहर को छोडने को मजबूर हूऐ ओर लाहोर में ऐक गुरुदवारे में पनाह लेनी पढी फिर उनहे कराची में ही रहना पढा। यह ई नहि उनहे रोज धमकिया मिलनी लगी कि यदि वह अपना विरोध करणा बंद नहि किया तो उनके मार कर उनहे कुत्तो को खिलाया जाऐगा।

यदि हम सिंध से छपने वाली सिंधी अखबारो की बात करे तो चोकाने वाली खबरे सामने आति है जो कु इस प्रकार है…

क)     लडकियो के लिखित बयान पहिले से ही लिखे गऐ थे

ख)     कराचि के पनाहि घर में जहां पर रिंकल ऐं लता को रखा गया वहा पर नोवेद साह ऐं मिया मिठू घंठो तह आया करते थे।

ग)      आशा कुमारी के लिये जब फिरोती की रकम मागी गई तो फिर उसके चाहि से मुसलमानि बंनने का सवाल कहां से पैदा होता है। यह भी यादि रखना चाहिये कि वह फिरोती की रकम  दिन पर दिन पढती गई।

घ)      हिंदु समूदाय के वकिलो को कयों नहि बोलने दिया गया

ङ)      लडकियों को कयूं उनके माताऔ से मिलने नहिं दिया गया

च)      इस फैसले के दूसरे दिंन आशा कुमारी को ऐक निजी टी वी चैनेल में पेश किया गया जिस में वह पुरी मुर्र्झाई हूई थी। यदि उनहोने अपने पंसंद से निकाहि और अपना धर्म बदला हो तह यह मायूंसि कयों…

 

आशा कुमारी ऐक निजी टि वी चेनेल पर

इन फेसले के ऐक दिन बाद अमेरिका में सिंध ते तालुक रखने वालो की संसथा साना (Sindhi Association of North America) ऐंवम हिंदुस्तानि से तालूक रखने वाले सिंधी हिंदु समूदाय नें इस पूरे मसले को अंतर्राष्टिय अदालतो में ले जाने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि इस संधर्ब में उनकी बात रिंकल कुमारी का मामा श्री रमेश कुमार ऐं कुछ वकिलो से बात चल रहि है और जेसे ही कार्ट के कागजात हाथ में ऐयेगे केस दाखिल किया गायेगा।

हिदुस्तानि ऐं पाकिसातनि के दर्मियान पहिले ही ऐक समझोता रहा है- नेहरु लियकत संझौता जिसके तहत ऐक दूसरे के मूलक में अल्पसंखयको को तहफूज देने का पुरा प्रावधान है। पर हिंदुऔ की पाकिस्तानि में स्थिती से यह लगता नही की पाकिस्तानि इनहे कभी भी हकिकत में लागु नहीं करेगा। हमारे पास पहले ही ऐसे उधारन रहे है पुर्वी पाकिस्तानि के जहा पर हिंदुऔ पर जुलम हूऐ।

सिंध में हिंदुऔ से होते हूऐ जुलम कुछ अहम सवाल पैदा करते है कि कया हम चुप चाप यह सब बैठ कर दे॒खते रहे या भारत सरकार कुछ पहल करे। सवाल यह भी है कि यदि हम फिलिस्तिनियो के लिऐ या दक्षिन अफ्रिका के रंग भेद निति के विरुध आवाज उठा सकते है तो हिदुओ के हिमायति में कयो नहिं…..

 

कितनि अजिब सी बात है कि पाकिसानि सदर असिफ अली जर्दारी सुफी दर्गाह पर जियरात करने आते है जिसे हिदुस्तानि के प्रधान मंत्री स्वागत करते है पर उहे जे सुबे में उनहि के पार्टी के सांसद मिया मिठू  हिदु लडकियो का जबरनि अगवा और धर्म परिवतिन कराते है जिसपर जर्दारि कोई भी कदम नहि लेते जब की उनकी बहन मिया मिठी के काले कार्नामें के विरुध बयान देती हैं। सवाल यह भी है कि कया हिंदुस्तानि की खामोशी ऐक सही कदम माना जाय….यदि कोई जुलमु पाकिसानि में हो तो कया हम इस की निंदा करने का भी हक नहि रखते। फिर पाकिस्तानि में भकंप या बाड आति हे तो यदि मदद कर सकता है तो कया हम हिंदुओ पर होले जुलम की बात तक नहि कर सकते है…

 

अदालत के बाहर रिंकल की मां रोते हूऐ

ऐक तरहि से देखा जाऐ तो बात मात्र तिन लडकियो की नही है। यह सभ पिछले 65 सालो से चल रहा है। विभाजन के बाद भी सिंध में 1950 तह 13 प्रतिशद हिंदु थे पर अब वहां मात्र 1-2 प्रत्रिशद ही बचे है। यहि यहि अगवा-जबरनि धर्म परिवर्तनि की हूई हिंदु लडकियों की तादाति हजारो में बताई जाति है। पाकिसातनि के अल्पसंखयक संसथा का कहना है कि हर महिने 20 हिंदु लडकीया अग॒वा होती है मसतब लग भग हर दिन ऐक लडकी का अपहरनि होता है।

सिंध में बचे हिदुओ में 80 प्रतिसद दलिद हिंदु है जिनहे इस जूलम का सबसे वडा सिकार होना पपड रहा है। कहा जाता है कि वारदाति के बाद ऐफ आई आर भी दर्ज नहि की जाति है। यहि नहि रिकल मामले में यदि देखे तो हिंदु समूदाय को 5 घंटे सिंध – पंजाब हाईवे पर धर्ना दिया और हाई वे बंद रखा।

 

यहि हिंदुस्तानि के लोग उन फसे हूऐ हिंदुयो का साथ नहि देगे तो और किस की उमेद सिंध के हिंदु करे।

आज यह बहूत जरुरि है की हिंदुस्तानि की जनता ऐवम हकूमत जागे नहि तो सायदि पूर्वी पाकिसातानि जी तहर सिंध के हिंदु भी मारे जाऐगे।